आरबीआई ने कहा-एचडीएफसी बैंक में कोई बड़ी दिक्कत नहीं, शेयरों में रिकवरी

आरबीआई ने कहा-एचडीएफसी बैंक में कोई बड़ी दिक्कत नहीं, शेयरों में रिकवरी

No Material Concerns at HDFC Bank

No Material Concerns at HDFC Bank

नई दिल्ली: No Material Concerns at HDFC Bank: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाताओं में से एक, HDFC बैंक की स्थिरता और कार्यप्रणाली पर अपना पूर्ण भरोसा जताया है. केंद्रीय बैंक ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि HDFC बैंक एक 'डोमेस्टिक सिस्टेमिकली इंपॉर्टेंट बैंक' (D-SIB) है और इसकी वित्तीय स्थिति पूरी तरह सुरक्षित एवं सुदृढ़ है.

यह स्पष्टीकरण बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद उपजी चिंताओं के बीच आया है. चक्रवर्ती ने बैंक के साथ "वैल्यू और एथिक्स" से जुड़े मतभेदों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था, जिससे बैंकिंग जगत और निवेशकों के बीच हलचल मच गई थी.

नियामक का पक्ष: 'मटेरियल कंसर्न' का अभाव

RBI ने अपने बयान में कहा कि उसने बैंक में हाल के घटनाक्रमों पर संज्ञान लिया है. बैंक द्वारा प्रस्तावित 'ट्रांज़िशन अरेंजमेंट' को मंजूरी देते हुए RBI ने कहा, "हमारे समय-समय पर किए जाने वाले मूल्यांकन के आधार पर, बैंक के आचरण या गवर्नेंस को लेकर रिकॉर्ड पर कोई बड़ी चिंता मौजूद नहीं है."

केंद्रीय बैंक ने आगे आश्वस्त किया कि बैंक के पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध है और इसकी वित्तीय स्थिति संतोषजनक होने के साथ-साथ पर्याप्त लिक्विडिटी भी मौजूद है. नियामक ने बैंक के बोर्ड को 'प्रोफेशनली संचालित' और प्रबंधन टीम को 'काबिल' करार दिया है.

केकी मिस्त्री की अंतरिम कमान

इस्तीफे के बाद उत्पन्न नेतृत्व शून्यता को भरने के लिए, RBI ने ग्रुप के अनुभवी दिग्गज केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है. यह नियुक्ति 19 मार्च से प्रभावी हो गई है.

निवेशकों और विश्लेषकों के साथ एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान, 71 वर्षीय केकी मिस्त्री ने बैंक की साख का बचाव किया. उन्होंने कहा, "मैं यह जिम्मेदारी तभी स्वीकार कर रहा हूँ क्योंकि यह मेरे मूल्यों और सिद्धांतों के अनुरूप है. अगर कुछ गलत होता, तो मैं इस उम्र में यह भूमिका नहीं लेता." उन्होंने बैंक के भीतर किसी भी प्रकार के 'पावर स्ट्रगल' की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि इस्तीफे के पीछे कोई ठोस या नकारात्मक वजह नहीं थी.

हालांकि RBI और नए प्रबंधन ने निवेशकों को आश्वस्त करने का प्रयास किया है, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद बैंक के शेयर शुरुआती कारोबार में दबाव में देखे गए. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI द्वारा इतनी शीघ्रता से अंतरिम चेयरमैन की नियुक्ति को मंजूरी देना यह दर्शाता है कि नियामक बैंक के कामकाज से संतुष्ट है, जिससे आने वाले दिनों में निवेशकों का भरोसा बहाल होगा.